बिहार सरकार ने सड़क हादसों में घायल लोगों को तत्काल और बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना बनाई है। अब राज्य के हर जिले में शहर से दूर, हाईवे के किनारे एक ट्रॉमा सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस पहल से सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा और उन्हें इलाज के लिए पटना नहीं जाना पड़ेगा। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा। यह कमेटी हाईवे के आसपास उपयुक्त ज़मीन की पहचान करके अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपेगी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
विशेष कमेटी करेगी स्थान का चयन और सर्वे
जिलाधिकारी के नेतृत्व में बनने वाली इस विशेष कमेटी में पुलिस अधीक्षक (ट्रैफिक)/उप-पुलिस अधीक्षक (ट्रैफिक), सिविल सर्जन, जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) और पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता शामिल होंगे। ये अधिकारी संयुक्त रूप से ज़िले के उन क्षेत्रों का सर्वे करेंगे, जहाँ सड़क हादसे सबसे ज़्यादा होते हैं, और उसी के आधार पर ट्रॉमा सेंटर के लिए स्थान तय किया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि अधिकांश दुर्घटनाएं हाईवे पर होती हैं, जबकि बड़े अस्पताल शहरों के अंदर होते हैं। इस कारण एंबुलेंस को पहुंचने में काफी समय लगता है, जिससे गंभीर मरीजों को ‘गोल्डन आवर’ में इलाज नहीं मिल पाता। अधिकारियों का मानना है कि हाईवे से सीधे जुड़े होने पर एंबुलेंस 5 से 10 मिनट में पहुंच सकेगी, जिससे जान बचने की संभावना बढ़ेगी।
प्राइवेट ट्रॉमा सेंटर में मुफ्त होगा इलाज
इस सरकारी पहल के साथ-साथ, राज्य में दो बेहतर प्राइवेट अस्पतालों में भी ट्रॉमा सेंटर तैयार किए जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन प्राइवेट ट्रॉमा सेंटरों में सड़क हादसों के मरीजों का इलाज बिल्कुल मुफ्त होगा। इसका पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी, जिसके लिए सड़क सुरक्षा फंड का उपयोग किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या को कम करना और गरीब तथा सामान्य परिवारों के मरीजों को भी मुफ्त में बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है।




