बिहार से सूरत ले जाए जा रहे 20 नाबालिग बचाए:40 घंटे बाद 6 आरोपियों पर केस; बंधुआ मजदूरी के लिए भेज रहे थे बच्चे।
विदिशा रेलवे स्टेशन पर कटिहार से सूरत ले जाए जा रहे 11 से 16 वर्ष के 20 नाबालिग बच्चों को बंधुआ मजदूरी से बचाया गया। रेलवे सुरक्षा बल और विदिशा सोशल वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्त अभियान में 6 संदिग्धों को हिरासत में लेने के 40 घंटे बाद हुई कार्रवाई।
गिरफ्तार आरोपियों में कटिहार के मोह. मशदूर, सगीर आलम, मोह. बाबर और मोह. जियावुल, किशनगंज के मोह. अंसार और पूर्णिया के इंजामुल अली शामिल हैं। प्रत्येक संदिग्ध 1 से 3 बच्चों को ले जा रहा था।
आरोपियों ने बच्चों को अपना रिश्तेदार बताया, जिससे जीआरपी जांच में उलझी रही। 40 घंटे तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। मीडिया द्वारा मामला उठाने के बाद आरोपियों के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 81 के तहत केस दर्ज किया गया।
बिहार से गुजरात ले जा रहे 34 लोग विदिशा उतारे:सामाजिक संगठन का दावा- नाबालिगों को बंधुआ मजदूर बनाते; 6 GRP की हिरासत में बिहार से गुजरात ले जा रहे 34 लोगों को विदिशा स्टेशन पर उतारा। इनमें 20 नाबालिग हैं। पूछताछ में बताया कि नाबालिगों को काम कराने के नाम पर तो कुछ काे मदरसे में पढ़ाई कराने का कहकर सूरत ले जाया जा रहा था।
इस मामले में 6 लोगों को भी हिरासत में लिया है, इन पर आरोप है कि ये बच्चों को ले जाकर उनसे बाल मजदूरी कराते हैं।
यूपी के पंडित दीनदयाल रेलवे स्टेशन से सामाजिक कार्यकर्ताओं की सूचना पर विदिशा की सोशल वेलफेयर सोसाइटी ने रात में ट्रेन रोककर बच्चों समेत 34 लोगों को उतारा। उनके अलावा जो लोग यहां नहीं उतर सके, उन्हें रतलाम और बड़ौद से.
