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बिहार : बिहार शिक्षक संघ दो फाड़, अपॉइंटमेंट लेटर बांटे जाने पर नीतीश सरकार के लिए थोड़ी खुशी थोड़ा गम

नियुक्ति पत्र वितरण को लेकर शिक्षक संघ दो फाड़ हो गया है। एक संघ शिक्षकों को नियुक्ति पत्र लेने को सही कदम मान रहा। जबकि एक संघ इस नियुक्ति पत्र लेने को आत्मघाती कदम मान रहा है। हालांकि राज्य सरकार सक्षमता पास शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देने पर भले आमादा हो, लेकिन कई शिक्षक नियुक्ति पत्र लेने से इनकार करने लगे हैं।

कई शिक्षक संघ की भूमिका भी इन दिनों सरकार के इस नियुक्ति पत्र वितरण समारोह का विरोध करने की है। बताया यह जा रहा है कि इस नियुक्ति के साथ सरकार आपकी पहले की गई सेवा को खत्म कर नई नियुक्ति पत्र देकर नई नौकरी देना चाहती है।

नियुक्ति पत्र लेने में क्या परेशानी है?

सरकार नई नियमावली बनाकर पूर्व की सेवा खत्म करना चाहती है। राज्य सरकार ने न्यायालय में लिख कर दिया है कि सक्षमता या बीपीएससी परीक्षा पास शिक्षक की नौकरी नई होगी। इस बात से शिक्षक और शिक्षक संघ परेशान है। संघ ने तो सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध शिक्षकों से इस नियुक्ति पत्र कार्यक्रम का बायकॉट करने का आग्रह किया है।

क्या है संघ का आह्वान?

माध्यमिक शिक्षक संघ ने ट्रांसफर-पोस्टिंग पॉलिसी को लेकर अपना विरोध जताया जाए। साथ ही बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने सक्षमता पास शिक्षकों से नियुक्ति-पत्र नहीं लेने की अपील की है। संघ के महासचिव और पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह का आरोप है कि सरकार अवैध एवं साजिशपूर्ण तरीके से पूर्व की सेवा की निरंतरता दिए बगैर 20 नवंबर को नियुक्ति-पत्र बांटा जा रहा है, जिसमें सेवा की निरंतरता का कहीं उल्लेख नहीं है।

क्या करने जा जा रहा है संघ?

बिहार सरकार की दमनकारी नीति के विरुद्ध लाखों नियोजित शिक्षक 19 नवंबर को शाम 5 बजे मशाल जुलूस निकालेंगे। बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के सचिव मंडल ने सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि सरकार जब तक ट्रांसफर, पोस्टिंग, सेवा निरंतरता संबंधी शिक्षक विरोधी नीति में संशोधन नहीं करती है। तब तक राज्य के नियोजित शिक्षक नियुक्ति-पत्र लेने से मना करते रहेंगे।

पूर्व से कार्यरत नियोजित शिक्षकों को 18 साल की सेवा पूर्ण करने के बावजूद प्रोन्नति नहीं दी गई है। सक्षमता परीक्षा उत्तीर्ण टीचरों से ऐच्छिक स्थानांतरण के बदले 10 अनुमंडलों का विकल्प मांगा जा रहा है। महिला, दिव्यांग शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों को भी परेशान किया जा रहा है। तब भी सरकार नहीं मानती है तो 28 नवंबर को विधानमंडल के समक्ष धरना देना निश्चित हुआ है।

शिक्षक की राह में रोड़ा नहीं अटकाए संघ: शैलेंद्र शैलू

अखिल भारतीय शैक्षिक संघ नई दिल्ली के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव शैलेन्द्र कुमार शर्मा उर्फ शैलू का मानना है कि जो शिक्षक नियुक्ति पत्र लेकर राज्यकर्मी का दर्जा मांगना चाहते हैं तो संघ उनकी राह में रोड़ा क्यों अटका रहा है। ये शिक्षक आगे बढ़ना चाहते हैं। परीक्षा देने का उद्देश्य ही इनका था कि राज्यकर्मी का दर्जा और सुविधाएं मिले।

वह जानते हैं कि नियुक्ति पत्र ले साथ नई नियुक्त शिक्षक के रूप में जाने जाएंगे और पूर्व की सेवा समाप्त कर दी जाएगी। शिक्षक अपनी समृद्धि के मार्ग पर चलना चाहते हैं तो चलने दे। यही शिक्षक बीपीएससी परीक्षा पास कर अधिकारी बने। यही शिक्षक यूपीएससी तक क्लीयर किए हैं। नई सेवा में जाने के बाद उनकी पुरानी सेवा थोड़े न जुड़ती है। राज्य सरकार ने तो पहले ही न्यायालय में यह कहा है कि शिक्षक जो सक्षमता या फिर बीपीएससी पास करेंगे उनकी नई सेवा शुरू हो जाएगी। पुरानी सेवा समाप्त हो जाएगी। राज्य सरकार की नीति पर उनको विश्वास है। इसलिए संघ उनकी राह बाधा न पहुंचाए।

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