बिहार : BDO मैडम की गाड़ी में आगे बिहार-पीछे यूपी का नंबर:सरकारी बोर्ड, शीशे पर बिहार सरकार भी लिखा; बोलीं-जल्दबाजी में पुराना नंबर प्लेट रह गया
सहरसा के एक महिला सरकारी अधिकारी की गाड़ी पर दो अलग-अलग राज्यों की नंबर प्लेट लगी है। गाड़ी के आगे बिहार का रजिस्ट्रेशन नंबर (BR 06 DT 8204) और पीछे उत्तर प्रदेश का रजिस्ट्रेशन नंबर (UP 14 CJ 7708) है।
ये सौर बाजार प्रखंड की BDO (ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) नेहा कुमारी की पर्सनल गाड़ी बताई जा रही है। गाड़ी पर पीछे के शीशे पर बिहार सरकार लिखा है। आगे नंबर प्लेट के ऊपर प्रशासन प्रखंड विकास पदाधिकारी सौर बाजार सहरसा का बोर्ड भी लगा हुआ है। 2 अलग-अलग नंबर प्लेट वाली गाड़ी का वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है।
मैडम बोलीं- हड़बड़ी में गलती हो गई
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद BDO नेहा कुमारी ने कहा कि ‘पहले गाड़ी पर यूपी का नंबर था। बिहार लाने पर इसका रजिस्ट्रेशन चेंज करवाया था।मुजफ्फरपुर जिले से रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई किया। रजिस्ट्रेशन नंबर मिल भी गया।
नया रजिस्ट्रेशन नंबर मिलने के बाद गाड़ी DTO भेजी थी। DTO ऑफिस में गाड़ी के आगे वाला नंबर प्लेट तो चेंज कर दिया गया, लेकिन गाड़ी के पीछे लगी यूपी की नंबर प्लेट खुली ही नहीं। वहां इसे बाहर से खुलवाकर लाने के लिए कहा गया था।
मुझे कार्यालय आना था, इसलिए जल्दबाजी में मैंने भी ध्यान नहीं दिया। गाड़ी कार्यालय के बाहर लगी थी। इसी दौरान किसी ने मेरी गाड़ी का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। BDO (ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) नेहा कुमारी ने बताया कि वो अपनी पर्सनल गाड़ी से आवास से दफ्तर आती हैं। क्षेत्र में जाने के लिए सरकारी गाड़ी का ही इस्तेमाल करती हैं।
नंबर प्लेट को लेकर क्या है नियम
नियम के मुताबिक जब भी कोई गाड़ी खरीदी जाती है तो गाड़ी मालिक को परिवहन विभाग की ओर से गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है। एक नंबर प्लेट गाड़ी के आगे और दूसरा गाड़ी के पीछे लगता है। आगे और पीछे के नंबर प्लेट पर एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर होता है।
किस गाड़ी के लिए पहले कितना रजिस्ट्रेशन टैक्स लगता था अब कितना लगेगा
बिहार में राज्य सरकार ने सिर्फ कमर्शियल वाहनों का रजिस्ट्रेशन शुल्क कम किया है, प्राइवेट वाहनों का नहीं। यानि ओला-उबर जैसी कंपनियों में चलने वाली टू व्हीलर, ऑटो, कैब, ट्रैक्टर, बस, छोटे माल ढोने वाले अब सस्ते मिलेंगे लेकिन यदि आप प्राइवेट टू व्हीलर, कार कुछ भी खरीदते हैं तो आपको पहले जितना शुल्क ही चुकाना होगा। बिहार के मुकाबले झारखंड में गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन शुल्क कम है, इसलिए लोग गाड़ियां खरीदने बिहार जाते हैं। पटना में ही 10 हजार से ज्यादा गाड़ियां झारखंड नंबर की चल रही हैं। पटना के शोरूम संचालकों की मानें तो रजिस्ट्रेशन फीस ज्यादा होने के चलते लोग महंगी गाड़ियां झारखंड से ही खरीदते हैं, क्योंकि इसमें उन्हें बड़ी हो जाती है।
