Wednesday, September 30, 2026
Latest:
Featured

समाजसेवा का सर्वोत्तम माध्यम है पत्रकारिता : प्रो. संतोष दत्त झा

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, दरभंगा इकाई द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन सर्जना निखार शिविर के अंतर्गत आज पत्रकारिता, मेहंदी, मिथिला पेंटिंग एवं नृत्य प्रशिक्षण वर्गों का उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजन किया गया। विभिन्न वर्गों में छात्राओं ने पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने कौशल का विकास किया।

आज के प्रशिक्षण वर्गों में पत्रकारिता का सत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं न्यूज़ टुडे के संपादक प्रो. संतोष दत्त झा ने छात्राओं को पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों, साक्षात्कार, रिपोर्टिंग, मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारियों एवं डिजिटल युग में पत्रकारिता की बदलती भूमिका पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

अपने संबोधन में प्रो. संतोष दत्त झा ने कहा कि “पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाजसेवा का सर्वोत्तम माध्यम है। एक सच्चा पत्रकार समाज की आवाज़ बनकर जनसमस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाता है, सत्य को निर्भीकता से सामने लाता है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है। पत्रकार का दायित्व केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा और सही जानकारी देना भी है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में तथ्य और अफवाह के बीच अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है। यदि युवा सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ पत्रकारिता को अपनाएं, तो वे समाज में सार्थक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने समाचार लेखन की बारीकियों, भाषा की शुद्धता और नैतिक पत्रकारिता के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की।

 

मेहंदी प्रशिक्षण वर्ग में शिवानी शर्मा ने नए नए पारंपरिक एवं आधुनिक डिजाइनों का अभ्यास करते हुए रचनात्मकता का परिचय दिया। प्रशिक्षिक ने मेहंदी कला को घर बैठे स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बताते हुए इसकी व्यावसायिक संभावनाओं की भी जानकारी दी।

मिथिला पेंटिंग वर्ग में दर्प्रशन कुमार ने प्रतिभागियों को मिथिला की समृद्ध लोककला, पारंपरिक रंगों एवं प्रतीकों के महत्व से अवगत कराया गया। छात्राओं ने अपनी मिथिला की कल्पनाशक्ति को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करते हुए माछ , पान और मखान की आकर्षक कलाकृतियां तैयार कीं।

वहीं नृत्य प्रशिक्षण वर्ग में डांस फीवर एकेडमी के संचालक रवि सिंह ने छात्राओं ने सांस्कृतिक एवं लोकनृत्य की विभिन्न प्रस्तुतियों का अभ्यास किया। प्रशिक्षकों ने नृत्य को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव का सशक्त माध्यम बताया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *