वृक्षारोपण धर्म महान, एक वृक्ष कई संतान समान :- डॉ. शम्से आलम।
दरभंगा: सोमवार को महारानी कल्याणी महाविद्यालय में प्रभारी प्रधानाचार्य सह बर्सर सह भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. शम्से आलम की अध्यक्षता में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना की तरफ से वृक्षारोपण कार्यक्रम किया गया।
बतौर प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. शम्से आलम ने कहा कि आज विश्व पर्यावरण दिवस है। इस अवसर पर हम सब आज महाविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम कर रहे हैं। आज का दिन मानव व प्रकृति के बीच सामंजस्य बढ़ाने का दिन है। आज वैश्विक तापमान में वृद्धि सिर्फ विकसित देशों की ही नहीं बल्कि विकासशील देशों की भी ज्वंलत समस्या है। विकासशील देश, विकसित देशों की सूची में शुमार होने के लिये तो दूसरी ओर विकसित देश, विकसित सूची में बरकरार रहने के लिये अनवरत प्रकृति का अनियंत्रित दोहन कर रहे हैं। अंधाधुंध वृक्षों की कटाई, औद्योगिकरण व रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग कर प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। आज भौतिक सुखों में पूरा विश्व यह भूल गया है कि प्रकृति से छेड़छाड़ कर हम कितने दिन भौतिक सुख लेते रहेंगे। शहर से लेकर सुदूर गाँव तक में वातानुकूलित सिस्टम, फ्रिज आदि के युग में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। 5G एक तरफ इंटरनेट की क्रांति ला रही है तो दूसरी ओर प्रकृति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। इस सबके परिणामस्वरूप वैश्विक तापमान में वृद्धि हो रही है। ग्लोबल वार्मिंग अपना ऋणात्मक प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम में बदलाव आप सब हाल के वर्षों में देख ही रहे हैं। मरुस्थल में व पहाड़ों में बाढ़ आ रहा है। बिहार जैसे प्रदेशों में सुखाड़ व अकाल की स्थिति पैदा हो रही है। पर्यावरण संतुलन के लिये 33.3 प्रतिशत भाग में पेड़ होना चाहिये जबकि वर्तमान में देखा जाय तो वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2021 के अनुसार भारत में कुल भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 24.62 प्रतिशत भाग में ही पेड़ है। बिहार में तो मात्र 7.84 प्रतिशत है। अगर इस सबसे मानव को बचाना है तो इसका एकमात्र उपाय है हरित पर्यावरण। इसीलिए ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़ लगाएं व दूसरों को लगाने के लिये भी प्रेरित करें क्योंकि कहा भी गया है कि “वृक्षारोपण धर्म महान, एक वृक्ष कई संतान समान।” साथ ही जरूरत है पेड़ों के मात्रात्मक के साथ-साथ गुणात्मक रूप से समृद्ध करने की। इसके लिये पेड़ लगाने के साथ-साथ इसके लिये रख-रखाव नीति की भी जरूरत है।
राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी मुकुल किशोर वर्मा ने कहा कि प्रकृति को सेव करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है। प्रकृति मानव जगत को मिला सबसे बड़ा उपहार है। मानव जगत का अस्तित्व ही प्रकृति से जुड़ी हुई है। प्रकृति को सेव कर ही हम मानवजगत की कल्पना कर सकते हैं। इसीलिए आज की सबसे बड़ी जरूरत हरित प्रकृति की है। यहां उपस्थित शिक्षकों, कर्मियों व छात्र-छात्रा से मेरा यह आह्वान है कि आप यह प्रण लें कि हम ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़ लगाएंगे। हम अब लोगों को जागरूक व प्रेरित करने के लिये दूसरे गिफ्ट को पेड़ से रिप्लेस कर उपहार प्रदान करेंगे। हर उत्सव के मौके पर अपने हाथों से जरूर एक पेड़ जरूर लगाएंगे। यह आपके आने वाले भविष्य के नौनिहालों के जीवन को सुरक्षित रखेगा। आपसे आपके बच्चों का व साथ में पर्यावरण का भविष्य जुड़ा है। अब यह सोचने का समय आ गया है कि अपने बच्चों के लिये हम क्या छोड़ रहे हैं हरित पर्यावरण या पर्यावरण असंतुलन? इस साल के विश्व पर्यावरण का थीम “प्लास्टिक प्रदूषण का समाधान” है। तो आईये हम यह भी शपथ लेते हैं कि भविष्य में प्लास्टिक का उपयोग बिल्कुल नहीं करेंगे। क्योंकि यह पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन है।
इस अवसर पर शिक्षक डॉ. चंदन ठाकुर, प्रधान सहायक कन्हाई चौधरी, लेखापाल विमल कुमार, सहायक शेखर चौधरी, शाहनवाज अनवर अंसारी, राकेश कुमार, ओम प्रकाश शाह, राजेश कुमार व जितेंद्र कुमार समेत समेत कई छात्र-छात्रा उपस्थित थे।
