सहरसा में अगले 4 दिन सामान्य रहेगा मौसम:हल्की बारिश की संभावना,अधिकतम पारा 34 डिग्री सेल्सियस।
सहरसा में अगले 4 दिनों तक मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 26 अक्टूबर को हल्की बारिश की संभावना है। इस दौरान किसानों को धान, रागी, मक्का और सब्जियों की फसलों के लिए विशेष कृषि परामर्श जारी किया गया है।
न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस
कृषि अनुसंधान संस्थान भगवानपुर के कृषि मौसम वैज्ञानिक देवन कुमार चौधरी ने बताया कि, अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। सुबह की सापेक्षिक आर्द्रता 70 से 77 प्रतिशत और दोपहर में 45 से 57 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है। हवा पूर्वी दिशा में 2 से 5 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलेगी। आसमान सामान्यतः साफ रहेगा, और फिलहाल कोई मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है।
कृषि मौसम वैज्ञानिक देवन कुमार चौधरी।
इमिडाक्लोप्रिड का करें छिड़काव
किसानों को धान की फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। यदि फसल में गंधी बग कीट का प्रकोप दिखाई देता है, तो इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल की 0.5 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
तना छेदक कीट की रोकथाम के लिए फिप्रोनिल 80 डब्ल्यूजी का 0.3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इसके अतिरिक्त, धान में बाली निकलने के समय प्रति हेक्टेयर 30 किलोग्राम नत्रजन की टॉप ड्रेसिंग करें।
स्वीट कॉर्न की बुवाई शुरू करें
जिन किसानों की रागी की फसल कटाई योग्य हो गई है, उन्हें समय पर कटाई करने की सलाह दी गई है, ताकि दाने झड़ने से होने वाले नुकसान से बचा जा सके। खरीफ मक्का की फसल तैयार होने पर उसकी कटाई भी शीघ्र करें। स्वीट कॉर्न की बुवाई करने वाले किसान अब खेत की तैयारी शुरू कर सकते हैं।
फूलगोभी, बंदगोभी और गांठगोभी की नर्सरी तैयार करने का यह उपयुक्त समय है। इसके लिए 10 मीटर लंबे और 1 मीटर चौड़े बेड बनाएं। मिट्टी को कार्बेन्डाजिम + मैन्कोजेब (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) से उपचारित करें। 21 दिन पुरानी पौध तैयार होने पर खेत में रोपाई शुरू की जा सकती है।
पशुशाला को रखें स्वच्छ
दुधारू पशुओं को हरे चारे के साथ खनिज मिश्रण अवश्य खिलाएं। यदि पशु दीवार या नाद चाटते हैं, तो उन्हें नमक देना आवश्यक है। पशुशाला को स्वच्छ रखें और पशुओं को स्वच्छ पानी पिलाएं, ताकि संक्रामक रोगों से बचाव हो सके। नियमित रूप से पशु चिकित्सक की सलाह भी लेते रहें।
