नौसानगर बस्ती में नाला है न सड़क बारिश हाेते ही घरों में घुस जाता पानी।
मधुबनी। नौसानगर (पश्चिमी टोल), जो नगर निगम क्षेत्र में पहले से ही शामिल है, आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां की 60 फीसदी आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है।
मोहल्ले में एक मात्र सबमर्सिबल लगा हुआ है, लेकिन उससे पूरी बस्ती तक पानी की सप्लाई संभव नहीं हो पाती। इस कारण महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खाना पकाने, बर्तन धोने और कपड़े धोने जैसे रोजमर्रा के काम पानी के बिना अधूरे पड़ जाते हैं। पुरुष किसी तरह अन्य मोहल्लों के चापाकल या सबमर्सिबल से अपना नित्यकर्म निपटा लेते हैं, लेकिन महिलाएं और बच्चे गंभीर दिक्कतों का सामना करते हैं।आरके
कॉलेज से संतुनगर चौक तक जाने वाली सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह गड्ढों ने इसे खतरनाक बना दिया है। बरसात के मौसम में यहां की स्थिति और बिगड़ जाती है। मच्छहट्टा चौक पर जलजमाव और गंदगी की समस्या लोगों के लिए स्थायी संकट बन चुकी है। प्रतिदिन हजारों लोग इसी मार्ग से गुजरते हैं और उन्हें जलजमाव व बदबू से दो-चार होना पड़ता है। यही गंदगी मच्छरों की भरमार कर रही है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय निवासी शाहजहां खातून, नाजिया खातून, समिदा खातून, अमीरुन निशा, समीना खातून, शबरूल निशा, मोहम्मद अकबर अली, इजाज अहमद, मोहम्मद फिरोज और मोहम्मद मुकम्मल ने बताया कि कई बार आंदोलन और शिकायतों के बावजूद निगम प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। महिलाओं ने खासतौर पर पेयजल संकट को अपनी सबसे बड़ी समस्या बताया। उनका कहना है कि पानी के बिना घर का कोई भी काम पूरा नहीं हो सकता और रोजाना शाम को पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है।
नौसानगर में गरीबी की मार सबसे गहरी है। लगभग 60 प्रतिशत आबादी झोपड़ी या कच्चे मकानों में रह रही है। बरसात के दिनों में पानी घरों में घुस जाता है, जिससे परिवारों का जीना मुहाल हो जाता है। आवास योजना का लाभ अब तक अधिकांश गरीब परिवारों तक नहीं पहुंचा। इस बस्ती का सरकारी स्कूल भी अव्यवस्था का शिकार है। यहां की हालत बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर डाल रही है।
घर में सुविधाओं की कमी और स्कूल में बदहाल वातावरण से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व पार्षद मोहम्मद इदरीश ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने कई बार अधिकारियों और नगर निगम प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन समाधान समय पर नहीं हुआ। वहीं जफर अली ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर तुरंत पहल नहीं की गई तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
लोगों की मांग है कि यहां जल्द से जल्द नल-जल योजना लागू हो, सड़क की मरम्मत और नाले की सफाई की जाए तथा आवास योजना के लाभार्थियों की सूची में असली गरीब परिवारों को शामिल किया जाए। फिलहाल नौसानगर के लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। पेयजल की समस्या बनी गंभीर: नौसानगर की 60 फीसदी आबादी पेयजल संकट से बुरी तरह त्रस्त है। मोहल्ले में एक मात्र सबमर्सिबल होने के बावजूद पानी की सप्लाई पूरे इलाके में नहीं हो पाती।
महिलाएं रोजाना पानी की कमी से सबसे ज्यादा जूझती हैं, क्योंकि घर के सारे काम पानी के बिना रुक जाते हैं। बर्तन धोने से लेकर बच्चों के लिए खाना पकाने तक हर काम के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। पुरुष किसी तरह अन्य जगहों से पानी लाते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए यह स्थिति रोजमर्रा का संघर्ष बन चुकी है। नौसानगर में घर और शिक्षा बदहाल : वार्ड नंबर 12 के नौसानगर की 60 प्रतिशत आबादी आज भी झोपड़ीनुमा घरों में जीवन बसर कर रही है।
बरसात के दिनों में इन घरों में पानी भर जाने से लोगों का जीना दुश्वार हो जाता है। गरीब परिवारों को अब तक आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया, जिससे हर साल बारिश में विस्थापन जैसी स्थिति बन जाती है। वहीं, बस्ती का सरकारी स्कूल भी बदहाली का शिकार है। मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और बच्चों को स्वच्छ वातावरण नहीं मिल पाता। घरों की अव्यवस्था और स्कूल की लापरवाही मिलकर बच्चों की पढ़ाई को गहराई से प्रभावित कर रही है। गरीब परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का सपना देख भी नहीं पा रहे हैं।
स्थानीय लोग कहते हैं कि अगर आवास और शिक्षा की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो यह बस्ती हमेशा पिछड़ेपन में ही फंसी रहेगी। बरसात में बढ़ जाती हैं समस्याएं आरके कॉलेज से संतुनगर चौक तक की सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। गदियानी चौक पर जलजमाव और गंदगी लोगों को रोजाना परेशान कर रही है। बरसात के दिनों में यह समस्या और बढ़ जाती है, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा मंडराता है।
आसपास के लोग बदबू और मच्छरों की समस्या से हलकान हैं। यही वजह है कि बच्चों और बुजुर्गों में बीमारी की आशंका लगातार बनी रहती है। स्थानीय लोग कहते हैं कि वर्षों से सड़क और नाले की मरम्मत का वादा हो रहा है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। ———–बोले जिम्मेदार——— आरके कॉलेज से बुबना उद्यान होते हुए संतुनगर तक की सड़क निर्माण का निर्णय हो चुका है।
लगभग 17 करोड़ की लागत से सड़क व नाला निर्माण होगा। वहीं नौसानगर क्षेत्र की अन्य समस्याओं के लिए भी लगातार पहल की जा रही है। यहां के लोगों को पेयजल संकट और जलजमाव से जूझना पड़ रहा है, यह बेहद गंभीर स्थिति है। नगर निगम को इस पर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस इलाके में नल-जल योजना का विस्तार हो। आवास योजना का लाभ असली गरीब परिवारों तक पहुंचे, इसके लिए निर्देश दिये गये हैं। लोगों को इन समस्याओं से छुटकारा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। -समीर कुमार महासेठ, विधायक नौसानगर की हालत बेहद खराब है।
यहां की 60 फीसदी आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। महिलाओं को सबसे ज्यादा कठिनाई होती है क्योंकि घर के हर काम के लिए पानी जरूरी है। एक सबमर्सिबल से पूरी बस्ती की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। सड़क की हालत जर्जर है और गदियानी चौक पर गंदगी व जलजमाव से लोग नारकीय जीवन जी रहे हैं। नगर निगम और उच्च अधिकारियों से इस पर कार्रवाई की मांग की, लेकिन केवल आश्वासन मिला। बस्ती में गरीब लोग झोपड़ीनुमा घरों में रहते हैं, बरसात में उनके घरों में पानी घुस जाता है। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित है क्योंकि स्कूल की स्थिति बदहाल है।
