Friday, July 24, 2026
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जिसका ना आदि है और न अंत, वो भाषा है हिंदी: प्रो. परवेज अख्तर।

दरभंगा: बुधवार को स्थानीय महारानी कल्याणी महाविद्यालय लहेरियासराय, दरभंगा में विश्व हिंदी दिवस का कार्यक्रम प्रधानाचार्य प्रो. मो. रहमतुल्लाह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रधानाचार्य प्रो. मो. रहमतुल्लाह ने कहा कि हिंदी भारत के विविध संस्कृतियों की पहचान है। हिंदी ही एक ऐसा भाषा है जिससे पूरा राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। अगर देखा जाय तो हिंदी सिर्फ एक भाषा ही नहीं संस्कार भी है। गंगा-जमुनी तहजीब में सेतु का कार्य करती है हिंदी। हिंदी ही एक ऐसा कारण है कि भारत में आज विविध संस्कृतियों के लोग एक साथ रह सकते हैं।

इस अवसर पर अंग्रेजी विभागाध्यक्ष सह महाविद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य प्रो. परवेज अख्तर ने कहा कि हिंदी ऐसे भाषाओं की सूची में शुमार है जिसका ना आदि है और न अंत। देश में कई आंदोलन हिंदी के बल ही सफल हुआ चाहे वो स्वतंत्रता आंदोलन हो, जेपी आंदोलन हो या अन्ना आंदोलन। वो भाषा हिंदी ही थी जो लोगों को आंदोलन स्थलों तक खींच लाया। हिंदी सिर्फ भाषा नहीं बल्कि एक संस्कार भी है। हिंदी बोलनेवाले अब अपने आप को सदैव गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। वो दिन दूर नहीं जब पूरे विश्व में लहरायेगा हिंदी का परचम।

हिंदी विभागाध्यक्ष सह महाविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. आलोक प्रभात ने कहा कि हिंदी एक जीवंत भाषा है। स्वतंत्रता आंदोलन में भी हिंदी ने ब्रह्मस्त्र का कार्य किया। अगर हिंदी न होती तो हिंदुस्तान के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को आंदोलन के दौरान एक पटल पर लाना नामुमकिन था। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, कामख्या से द्वारकाधाम तक व गंगटोक से गंगानगर को जोड़ती है हिंदी। हिंदी है तो वतन है।

महाविद्यालय के बर्सर सह भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. शम्से आलम ने कहा कि आज भले अंग्रेजी बोलनेवालों की संख्या सबसे अधिक है लेकिन देखा जाय तो वंदे भारत के स्पीड में हिंदी बोलनेवालों की तादाद सबसे तेजी से बढ़ रही है। हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं बल्कि संस्कार है। हमें गर्व है कि हम हिंदी पट्टी में जन्म लिये हैं। जब हिंदी पूरे विश्व में देगी दस्तक, तभी भारत बनेगा विश्वगुरु।

इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मी उपस्थित थे।

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