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छठ महापर्व लघु उद्यमियों को भी उपलब्ध करवाता है बड़ा बाजार, त्योहार के साथ रोजगार के अवसर।

प्रकृति एवं आस्था के साथ छठ महापर्व रोजगार दृष्टि से भी सभी समुदायों के लोगों द्वारा निर्मित लघु उद्योग के लिए विशेष महत्व रखता है। जिससे लघु उद्योग वर्गीय लोगों को पर्व के माध्यम से आर्थिक लाभ भी होता है। आस्था का महापर्व छठ में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। नहाय – खाय के साथ यह महापर्व शुरू हो जाएगा। इस आस्था के महापर्व को अब विदेशों में भी यहां के लोग धूमधाम से मनाने लगे हैं।

 

विदेशों में लोग पूरी आस्था के साथ इस पर्व को मनाएं इसके लिए कई संस्थान छठ से संबंधित सामग्री को स्थानीय कला के रंग में रंगकर विदेशों व देश के दूसरे राज्यों में भेज रहें हैं। इससे जहां छठ व्रती लोक महापर्व भी पूरी नियम निष्ठा से कर रहें हैं तो वहीं इससे रोजगार का भी सृजन हो रहा है। कई संस्थान इस सामग्री पर मिथिला चित्रकला उकेर कर इसे नेपाल, मोरिशस, सिंगापुर, अमेरिका व लंदन तक ऑनलाइन भेज रहें हैं। पिछले साल इस तरह की पहल सखीबहिनपा मैथिलानी समूह द्वारा विश्व स्तर पर निर्मित छठ सामग्री को भेजने का किया था जिसके बाद अब बिहार, दिल्ली में भी मिथिला चित्रकला से संबंधित कलाकार व संस्थान यह कार्य कर रही है। समूह की संस्थापिका आरती झा ने बताया की उनकी समूह की महिलाओं के द्वारा ये सामग्री बनाया जाता है जिससे उनको स्वरोजगार भी उपलब्ध होता है।

पूजा के लिए पूरा सेट 5100 रुपए का आता है सखी बहिनपा की जिला प्रभारी छाया मिश्रा ने बताया की छठ के पूरे सेट की कीमत 5100 रुपये है। जिसमें सूप, पथिया, हाथी, कोहा, डोरा – बद्धी, गुड़, आंटा, चावल, सिन्दूर, पीठार, कोनिया, भुसना सिंदूर, टेम्मी उपलब्ध रहती है। इसकी कीमत 5100 रुपये निर्धारित की गयी है। इसके साथ ही कुरियर, पोस्ट ऑफिस आदि स्रोतों से इसे विदेश व देश के अन्य राज्यों में भेजा जाता है। वहीं युवा मिथिला पेंटिंग कलाकार नंदनी झा ने कहा कि मिथिला पेंटिंग डिमांड के अनुसार छठ सामग्री पर मिथिला पेंटिंग ऊकेड़ी जाती है। कुछ लोग बिना पेंटिंग वाला खरीदना पसंद करते हैं। साथ ही स्थानीय स्तर के भी कलाकारों के द्वारा बनाई गयी छठ सामग्री सेट को लोग खूब पसंद कर रहे हैं।

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