जिला परिषद की राजनीति में पिछले ढ़ाई महीने से अध्यक्ष पद को लेकर चली रही राजनीति व जोरआजमाइश का शुक्रवार को उस समय पटाक्षेप हो गया जब वर्तमान जिला अध्यक्ष रेणु देवी को हार को सामना करना पड़ा। विपक्षी खेते की प्रत्याशी सीता देवी ने 16 वोटों से रेणु देवी को हराया। सीता देवी को 28 वोट मिले। जबकि रेणु देवी को मात्र 12 वोट पर ही संतोष करना पड़ा।
1 वोट को रद्द कर दिया गया। दो बार चुनाव की तिथि टलने के बाद शुक्रवार को विश्वास प्रस्ताव में भाग लेने कलेक्ट्रेट के सभागार पहुंचे जिप सदस्यों को करीब साढ़े 4 घंटे कैद रहना पड़ा। पिछली बार अदालत के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने जिप अध्यक्ष चुनाव के लिए निर्धारित 15 मार्च निर्धारित किया था। लेकिन इस बीच अध्यक्ष रेणु देवी एक बार फिर हाई कोर्ट पहुंच गईं। जिसकी शुक्रवार को ही सुनवाई होनी थी।
डीएम राजीव रौशन ने 3 बजे तक के लिए चुनाव प्रक्रिया को स्थगित करने की बात कह कर सभी सदस्यों को सभागार में ही बने रहने का आग्रह करके निकल गए। लेकिन जैसे ही 3 बजे अदालत से चुनाव प्रक्रिया पूरा कराने की सूचना मिली। विपक्षी खेमा में चहलपहल बढ़ गई। डीएम भी सभागार 3.17 मिनट पर पहुंच कर चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। फिर क्या था 2 घंटे के अंदर मतदान और उसकी गिनती आदि प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
सितंबर की बैठक में हुए बवाल से विपक्षी खेमा ने बनाया माहौल वर्तमान जिला परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ पटकथा 11 सितंबर 2023 को हुई जिप की बैठक में लिखी जा चुकी थी। योजना आवंटन को लेकर जिप की बैठक में काफी हंगामा विपक्षी खेमा के सदस्यों ने किया।
मामला तब और तूल पकड़ लिया जब तत्कालीन मजिस्ट्रेट ने विरोधी खेमा के 18 जिप सदस्यों पर एफआईआर दर्ज करा दी। जिसमें से जिप सदस्य स्वतंत्र कुमार झा एवं अमित ठाकुर को जेल तक जाना पड़ा। विपक्षी खेमा इस मामले की पूरी भड़ास अविश्वास प्रस्ताव के तौर पर एकजुटता के साथ निकालने में सफल रहे।
दूसरे प्रयास में अध्यक्ष बनीं सीता जिप सदस्य सीता देवी दूसरे प्रयास में अध्यक्ष बनीं। पहले प्रयास में रेणु देवी ने 1 वोट के मामूली अंतर से सीता देवी हराया था। जिला परिषद के 47 सदस्यों वाली सभा में रेणु देवी को 22 वोट मिले थे जबकि सीता देवी को 21 और 4 वोट रद्द हो गए थे।