गुरू-शिष्य सामीप्यता वर्ग में ही संभव : प्रो मेहता।

विश्वविद्यालय मैथिली विभाग में स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर की द्वितीय आन्तरिक परीक्षा समाप्ति के उपरान्त छात्र-शिक्षक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इसकी अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. दमन कुमार झा ने की । अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नियमित वर्गमें उपस्थिति से बच्चों में सम्पूर्ण कौशल का विकास होता है।

नियमित रहे बच्चों में अध्ययन के प्रति एक अलग ही जागरूकता उत्पन्न होती है। वर्ग में उपस्थिति से बच्चे अपने सिलेबस के अतिरिक्त अनुशासन का पाठ पढ़ते हैं।

बच्चों की उपस्थिति पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि जो बच्चे अनियमित हैं, वे निश्चित रूप से वर्ग में उपस्थित हों।

इसके लिए उन्होंने सभी को प्रेरित किया। विभागीय वरीय शिक्षक प्रो. अशोक कुमार मेहता ने बच्चों को संबोधित करते हुए गुरू-शिष्य सामीप्यता के लाभ को गिनाया तथा छात्र जीवन में समय की महत्ता एवं भविष्य के अवसर के प्रति सदैव जागरूक रहने के लिए कहा।

इस अवसर पर प्रथम सेमेस्टर की अवधि में कुल संचालित वर्ग उपस्थिति में सर्वाधिक तीन उपस्थिति वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।

इसमें सर्वाधिक उपस्थिति के लिए प्रथम स्थान पर रहीं गुंजन कुमारी , द्वितीय जनार्दन कुमार मुखिया को तथा तृतीय निरमा कुमारी को सम्मानित किया गया।

सम्मान में गुंजन को विभागीय पत्रिका ‘मैथिली’ के साथ मैथिली के चर्चित लेखक हितनाथ झा लिखित समीक्षात्मक पुस्तक – लेखरेख, प्रो अशोक कुमार मेहता सम्पादित पुस्तक- सम्प्रति, जनार्दन को विभागीय पत्रिका के साथ लेखरेख एवं निरमा कुमारी को

विभागीय पत्रिका मैथिली दिया गया। इस अवसर पर डा. सुनीता कुमारी,डा. सुरेश पासवान, विभागीय कर्मी भाग्यनारायण झा, निरेन्द्र कुमार, विभागीय शोधार्थी सत्यनारायण , दीपेश, दीपक, राज्यश्री, शालिनी, शीला, अम्बालिका, प्रियंका, वंदना, तथा प्रथम सत्र की छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।

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