विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग में 43वाँ स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ आयोजित


ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के ललित कला संकाय अंतर्गत विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग में 43वाँ स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर संगीत एवं नाट्य विधा के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

विभाग की स्थापना दिवस का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो ध्रुव कुमार, संकायाध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान संकाय और विभागीय सभी शिक्षकों के द्वारा के साथ आरंभ हुआ। इसके बाद संगीत विषय के छात्र-छात्राओं द्वारा कुलगीत की प्रस्तुति की गई। तबला संगति रविन्द्र कुमार सिंह तथा हारमोनियम पर मानस कुमार पांडे ने संगति की ।आज महालया का भी शुभ अवसर है, इसलिए देवी गीतों से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आरंभ हुआ। छात्र-छात्राओं ने ‘जय-जय भैरवी असुर भयाउनि…’ तथा ‘जगदंबा अहीं अवलंब हमर…’ का सुंदर गायन स्नातकोत्तर संगीत की दृष्टि, पल्लवी, शांति प्रिया, स्नेहा, कंचन, रोशन कुमार, रितिक कुमार, मानस कुमार पांडे सुधीर कुमार, प्रणव कुमार इत्यादि ने संयुक्त रूप से किया। तबला पर रामाधीन कुमार ने संगति की।


आज के ही दिन संयुक्त रूप से बनारस घराना के विद्वान गायक पंडित जालपा प्रसाद मिश्र का स्मरण दिवस भी मनाया गया, जिसके अंतर्गत छात्र-छात्राओं ने राग भैरवी में तीन ताल की बंदिश “बाट चलत मोरी चुनरी रंगदारी…” की मनोहारी प्रस्तुति की। संगीत के कार्यक्रम के अंत में बनारस घराने का ही दादरा “सांवरिया प्यारा रे मोरी गुईयां…” का गायन छात्र-छात्राओं के द्वारा सामूहिक रूप में किया गया।
समारोह के दौरान संगीत विधा के छात्र-छात्राओं ने मधुर संगीत की मनमोहक प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वहीं नाट्य विधा के विद्यार्थियों ने ‘शिक्षा में राजनीति और राजनीति में शिक्षा’ विषयक नाटक का सफल मंचन किया। नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने शिक्षा और राजनीति के आपसी संबंधों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया तथा दर्शकों को विचार करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ ने विभाग के ऐतिहासिक सफर पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संगीत विभाग की स्थापना वर्ष 1984 में आज ही के दिन हुई थी। इसके एक वर्ष बाद 1985 में नाट्य विषय की पढ़ाई की शुरुआत की गई। उन्होंने कहा कि संगीत एवं नाट्य विभाग निरंतर विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को निखारने तथा भारतीय कला एवं संस्कृति की परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
मुख्य अतिथि प्रो ध्रुव कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग एकमात्र ऐसा विभाग है जो अपना स्थापना दिवस मनाता है। यह गर्व का विषय है। विभाग में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति देखते हुए उन्होंने आश्चर्य और प्रसन्नता व्यक्त की कि इतनी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता इस आयोजन को सफल बनाने का द्योतक है। विभाग के निरंतर सक्रिय रहने की और उन्होंने विशेष ध्यान आकृष्ट किया और शुभकामना देते हुए कहा कि विभाग यूं ही निरंतर आगे बढ़ता रहे।

स्थापना दिवस समारोह ने विभाग की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शैक्षणिक परंपरा और विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता को एक मंच पर प्रस्तुत किया। संगीत की मधुर स्वर लहरियों और नाटक के प्रभावशाली मंचन ने समारोह को यादगार बना दिया। अंत में राष्ट्रगान के साथ इस स्थापना दिवस कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर विभाग के सभी शिक्षक एवं शिक्षककेत्तर कर्मचारी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग का यह स्थापना दिवस कला, संस्कृति और रंगमंच के प्रति समर्पण का प्रतीक बना।

Santosh Dutta Jha: