ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के ललित कला संकाय अंतर्गत विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग में राधाष्टमी के पावन अवसर पर संगीत के माध्यम से राधा का भावपूर्ण स्मरण एवं वंदना की गई।
कार्यक्रम में संगीत विभाग के विद्यार्थियों के द्वारा ने राधा-कृष्ण की भक्ति एवं प्रेम पर आधारित विभिन्न भजन, पद एवं संगीत की प्रस्तुतियाँ प्रस्तुत की- राधा ऐसी भही श्याम की दीवानी, मीठे रस से भरी राधा रानी लगी, श्यामा आन बसो वृंदावन में जैसे मधुर स्वर, भावपूर्ण गायन और भक्तिमय वातावरण ने पूरे विभागीय परिसर को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रंग से सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो लावण्य कीर्ति सिंह काव्या ने कहा कि भारतीय संगीत परंपरा में राधा-कृष्ण की भक्ति का विशेष स्थान है। संगीत के माध्यम से राधा के प्रेम, समर्पण, विरह और भक्ति के भावों को अभिव्यक्त किया जाता रहा है। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने इसी समृद्ध सांस्कृतिक एवं संगीत परंपरा को जीवंत किया।
इसके साथ ही संगीत एवं नाट्य विभाग में आयोजित विशेष व्याख्यान के दूसरे दिन लोक नाटक ‘जात्रा’ विषय पर विद्यार्थियों को विस्तृत जानकारी दी गई।
इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ हेमेन्द्र कुमार लाभ ने विद्यार्थियों को लोक नाटक ‘जात्रा’ की परंपरा, स्वरूप एवं विशेषताओं से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि जात्रा संगीत प्रधान लोक नाट्य परंपरा है, जिसका विकास मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में हुआ है। उन्होंने जात्रा में संगीत, गायन, अभिनय तथा संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसकी प्रस्तुति शैली और सांस्कृतिक महत्त्व की जानकारी दी।
श्री लाभ ने कहा कि लोक नाट्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की सांस्कृतिक परंपराओं, लोकजीवन और जनभावनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम भी है। अंत में पंडित विष्णु नारायण भातखंडे की पुण्यतिथि के अवसर पर उनका पुण्य स्मरण करते हुए प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ ने उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला तथा उनके योगदानों को चिन्हित किया।