पूर्णिया आर्ट एडवर्स की टीम ने बी.एड. (नियमित) में रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया


कजरी आदि नृत्य पर झूमा लनामिवि, दरभंगा का बी.एड. (नियमित) विभाग

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत संचालित शिक्षा शास्त्र विभाग (बी.एड. नियमित) में पूर्णिया आर्ट एडवर्स के बाल कलाकारों की शैक्षणिक एक्सपोजर विजिट आयोजित की गई। कार्यक्रम का समन्वय विभाग के डॉ अक्षय कुमार ने किया।

बाल कलाकारों का स्वागत करते हुए डॉ अरविन्द कुमार मिलन ने कहा कि अपने विभाग में रंगमंच के इन बाल कलाकारों का स्वागत करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। विभाग का उद्देश्य आनंदपूर्ण शिक्षा प्रदान करना रहा है, जहाँ छात्र-छात्रा बिना बोझ एवं तनाव के अध्ययन कर सकें । इसी क्रम में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए प्रतिष्ठित मंच मिला।

वहीं शिक्षा शास्त्र विभाग के प्रशिक्षुओं को लोककला एवं रंगमंच की विभिन्न विधाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में पूर्णिया आर्ट एडवर्स के बाल कलाकार रौनक ने भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले महान लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ‘भिखारीनामा’ का प्रभावशाली मंचन किया। अपने सशक्त अभिनय, संवाद-अदायगी, भाव-भंगिमा एवं मंचीय आत्मविश्वास से उन्होंने उपस्थित प्रशिक्षुओं और शिक्षकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। इसके बाद सुहानी ने अपनी मनमोहक ‘कजरी’ नृत्य प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हुए पूरे सभागार में समां बाँध दिया। रौनक एवं तन्वी ने बिहार की प्रसिद्ध लोक- सांस्कृतिक परंपरा पर आधारित ‘जट-जटिन’ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। दोनों कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय, तालमेल और आकर्षक नृत्य-कौशल को दर्शकों ने खूब सराहा। पुनः रौनक ने ‘गोदना’ गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर बिहार के लोकजीवन एवं लोकसंस्कृति की जीवंत झलक दिखाई। कार्यक्रम के समन्वयक एवं संचालक डॉ अक्षय कुमार ने सभी प्रस्तुतियों को सुव्यवस्थित क्रम में मंच पर प्रस्तुत कराया। उन्होंने बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों को शिक्षा एवं कला-समेकित अधिगम से जोड़ते हुए कार्यक्रम का संचालन किया। छात्र-छात्राओं ने लोकनृत्य, लोकनाट्य, अभिनय, वेशभूषा, भावाभिव्यक्ति, संवाद-अदायगी और मंच-प्रस्तुति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इससे उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि नृत्य एवं नाटक को विद्यालयी शिक्षण, कला- समेकित अधिगम और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास से किस प्रकार प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता विभागाध्यक्ष डॉ अरविन्द कुमार मिलन ने बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है। नृत्य, नाटक और लोककलाएँ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता, अनुशासन, सामूहिकता तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति का विकास करती हैं। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को शिक्षक- प्रशिक्षण और बाल प्रतिभाओं के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। डॉ मिलन ने बाल कलाकार तन्वी, रौनक एवं सुहानी को अपना आशीर्वचन प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि तीनों बच्चों में कला एवं प्रदर्शन की अद्भुत प्रतिभा है और उचित अवसर तथा मार्गदर्शन मिलने पर ये भविष्य में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए आश्वस्त किया कि भविष्य में जब भी उपयुक्त अवसर प्राप्त होगा, तब इन बाल कलाकारों को शिक्षा शास्त्र विभाग के कार्यक्रमों में पुनः अवश्य ही आमंत्रित किया जाएगा।

कार्यक्रम का समन्वय एवं मंच संचालन डॉ अक्षय कुमार ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ निधि वत्स ने किया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक डॉ शम्भू प्रसाद, डॉ अखिलेश मिश्र, डॉ शुभ्रा, डॉ कुमारी स्वर्णरेखा, डॉ शागुफ्ताह जबीं, डॉ उदय कुमार, कुमार सत्यम, गोविन्द कुमार, डॉ जय शंकर सिंह, डॉ रेशमा तबस्सुम, डॉ श्वेता झा, डॉ मो सबिहुर रहमान, डॉ कन्हैया कुमार पाण्डेय एवं डॉ नम्रता पराशर एवं बी.एड. द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे ।

Santosh Dutta Jha: