हिंदी समाहार मंच की ओर से साहित्यकार शंभु अगेही की दशम पुण्यस्मृति के अवसर पर उनके साहित्यिक अवदान को स्मरण करते हुए उनकी पुस्तकों की समीक्षा की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि, दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के माननीय विधान परिषद सदस्य श्री सर्वेश कुमार,चंद्रेश झा , गीतकार डॉ. अमरकांत कुंवर,प्रो.डॉ. रामचंद्र सिंह चंद्रेश तथा कार्यक्रम अध्यक्ष अखिलेश कुमार चौधरी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर अतिथियों को पुष्पमाला एवं चादर भेंट कर सम्मानित किया गया। श्रद्धा सुरभि ने स्वागतगान प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भावपूर्ण बना दिया।
पुस्तक समीक्षा चंद्रेश झा ने की। उन्होंने शंभु अगेही के साहित्यिक व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “शंभु अगेही की रचनाएँ केवल पुस्तक के पन्नों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज, संवेदना और मानवीय सरोकारों की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। उनकी लेखनी आज भी पाठकों के मन को स्पर्श करती है और नई पीढ़ी को साहित्य के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा देती है।”
उद्घाटनकर्ता श्री सर्वेश कुमार ने शंभु अगेही को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को दिशा देता है। शंभु अगेही का साहित्य हमारी सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत की महत्वपूर्ण धरोहर है। उनके साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
डॉ. अमरकांत कुंवर ने ‘स्वप्न’ प्रबंध काव्य की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि ‘स्वप्न’ एक ऐसा प्रबंध काव्य है, जो अतुकांत से प्रारंभ होकर तुकांत पर समाप्त होता है। इसकी कथा अति प्राचीन है, परंतु लेखन-शैली में कवि आधुनिक प्रवृत्ति के हैं। यह हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है।
प्रो. आशुतोष कुमार वर्मा ने ‘सतंजा’ कहानी-संग्रह की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि ‘सतंजा’ सात कहानियों का संग्रह है। इसमें दर्शन, कावित्व और कल्पना के साथ स्त्री-शिक्षा का संदेश निहित है। ‘सतंजा’ बज्जिका कहानी का प्रस्थान-बिंदु है।इस अवसर पर ई. राणा ब्रजेश ने बज्जिका में प्रकाशित अगेही की पुस्तकों की समीक्षा करते हुए कहा कि “शंभु अगेही एक रचनाकार ही नहीं, बल्कि एक युगद्रष्टा थे। उनमें शब्द-संयोजन की अद्भुत क्षमता थी।”
रामचंद्र चंद्रेश ने कहा कि “अगेही ने जो साहित्य-सृजन किया, वह समाज के लिए लिखा और देश के लिए लिखा। अगेही उच्च कोटि के चिंतक एवं मनीषी थे। वे एक कर्मयोगी थे।”मंच के सचिव अमिताभ कुमार सिन्हा ने कहा कि 24 अगस्त को बारह पुस्तकों का लोकार्पण तथा बिहार सहित अन्य राज्यों के लगभग 40 साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही बहुभाषी कवि सम्मेलन तथा विभिन्न पुस्तकों का लोकार्पण भी आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में साहित्य, भाषा और संस्कृति से जुड़े अनेक रचनाकार अपनी सहभागिता देंगे।
कार्यक्रम के अंत में संगीत शिक्षिका शरद रानी के नेतृत्व में रुद्राणी, आरूषी, प्रज्ञा एवं गुंजन ने भावनृत्य के माध्यम से कवि अगेही को श्रद्धांजलि दी।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा गया कि शंभु अगेही ‘बज्जिनाद’ एवं ‘अक्षर गंगा’ के संपादक थे। वे जीवनपर्यंत साहित्य-साधना में तल्लीन रहे। ‘कलम और कवि’, ‘जल तरंग’, ‘कैकेयीनंदन’, ‘कीर्तिलता’ का बज्जिका अनुवाद, ‘श्यामा संदेश’ तथा ‘मिथिला में शिव-शक्ति साधना की परंपरा’ आदि उनकी महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं।
कार्यक्रम में डॉ. सतीश चंद्र भगत, सूबेदार नंद किशोर साहू, अखिलेश कुमार चौधरी, अमरेश्वरी चरण सिन्हा, मुकेश झा सोनू, अतुल कुमार मिश्रा, बालेन्दु झा, शंभूनारायण चौधरी, चंद्रेश, राणा ब्रजेश, उदय शंकर चौधरी, सुजीत मल्लिक, राजीव कुमार, डॉ. प्रतिभा स्मृति, साकेत सौरभ ठाकुर, बद्री शर्मा, विनोद कुमार झा, पुनीत कुमार सिन्हा एवं राजन कार्तिकेय सहित अनेक साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
अंत में हिंदी समाहार मंच के उपाध्यक्ष डॉ. सतीश चंद्र भगत ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा, “साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को सार्थक बनाया। शंभु अगेही की स्मृतियों और साहित्यिक विरासत को जीवंत बनाए रखना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है। आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं सहयोगियों के प्रति मंच की ओर से हार्दिक आभार।”