शिक्षाशास्त्र विभाग में नवप्रवेशी छात्रों का कुलपति ने किया उत्साहवर्धन

व्यावहारिक प्रशिक्षण, शिक्षण-कौशल, तकनीकी दक्षता, नैतिक मूल्यों तथा भारतीय ज्ञान परम्परा का समन्वय जरूरी

शिक्षाशास्त्री सत्र 2026–28 के दीक्षारम्भ पर कार्यक्रम

फोटो – सत्रारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते माननीय कुलपति एवं अन्य पदाधिकारीगण।

दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग में शिक्षाशास्त्री सत्र 2026–28 के नवप्रवेशी छात्रों के लिए आयोजित दीक्षारम्भ एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान समय में केवल विषय-ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक शिक्षक के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण, शिक्षण-कौशल, तकनीकी दक्षता, नैतिक मूल्यों तथा भारतीय ज्ञान परम्परा का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा पद्धति के अनुरूप प्रशिक्षित कर उन्हें समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करना समय की मांग है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, अनुशासन एवं सतत अभ्यास के माध्यम से उत्कृष्ट शिक्षक बनने का रास्ता दिखाया। उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ डॉ निशिकांत ने बताया कि इस

कार्यक्रम के साथ ही नवप्रवेशी विद्यार्थियों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियों का भी शुभारम्भ हो गया है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं शिक्षकों ने छात्रों का स्वागत करते हुए उन्हें एक योग्य, संस्कारित एवं कुशल शिक्षक बनने के लिए प्रेरित किया एवं शुभकामनाएं भी दी।

डीन डॉ.पुरेंद्र वारिक ने छात्रों से कहा कि त्याग एवं समर्पण की भावना से हमें अध्ययन करना चाहिए।

अध्ययन में किया गया त्याग व समर्पण कभी व्यर्थ नहीं जाता है। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के कुशल शिक्षक हैं।

विशिष्ट अतिथि कुलसचिव डॉ. दिनेश झा ने कहा कि शिक्षाशास्त्री पाठ्यक्रम केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार शिक्षक के निर्माण की प्रक्रिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुशासनात्मक परम्पराओं का पालन करते हुए अध्ययन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का आग्रह किया। वहीं,वित्त पदाधिकारी डॉ. पवन कुमार झा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ प्रशिक्षण ही शिक्षकों की वास्तविक पहचान बनाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने तथा अपने व्यक्तित्व का समग्र विकास करने के लिए उत्साहित किया। इसी क्रम में शिक्षाशास्त्र निदेशक डॉ. घनश्याम मिश्र ने शिक्षाशास्त्री पाठ्यक्रम की संरचना, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, विद्यालयी अभ्यास, आंतरिक मूल्यांकन तथा पाठ्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण आधारित शिक्षा से ही दक्ष, उत्तरदायी एवं समाजोपयोगी शिक्षक तैयार किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षक डॉ. रामसेवक झा ने किया। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए शिक्षाशास्त्री पाठ्यक्रम की उपयोगिता, प्रशिक्षण की रूपरेखा एवं आगामी शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी तथा विद्यार्थियों को पूरे समर्पण के साथ अध्ययन एवं प्रशिक्षण में सहभागी बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में सभी नवप्रवेशी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य तथा सफल शैक्षणिक जीवन कीशुभकामनाएँ दी गईं l

 

कार्यक्रम में विभागीय प्राध्यापक डॉ.रामानंद झा, डा.निशा, डा. प्रीति रानी, डा.अवन कुमार राय,डा. संजीव कुमार झा, डा.पवन कुमार सहनी, गोपाल महतो सहित दर्जनों छात्र -छात्राएं सम्मिलित थे।

Santosh Dutta Jha: