लेखन की शुद्धता पर बल देना सबसे अधिक जरूरी : प्रो भीमनाथ झा
विद्यापति पीठ एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में आज विभागाध्यक्ष प्रो अरुण कुमार कर्ण द्वारा लिखित पुस्तक ‘अनुशीलन’ का गरिमामय विमोचन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य लोकार्पणकर्ता वरिष्ठ मैथिली साहित्यकार प्रो भीमनाथ झा, प्रो रमण झा, प्रो रमेश झा, डॉ अरविन्द कुमार सिंह झा, प्रो दमन कुमार झा, प्रो अशोक कुमार मेहता तथा डॉ सुनीता कुमारी सहित विभाग के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो भीमनाथ झा ने कहा कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का मैथिली विभाग प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की एक सशक्त परंपरा का केन्द्र रहा है। यहां से निकले अनेक छात्र आज मैथिली भाषा और साहित्य के मजबूत स्तंभ के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि लेखन सदैव मौलिक, तथ्यपरक और चिंतनपूर्ण होना चाहिए। लेखक के विचार और शब्द उसकी अपनी बौद्धिक साधना के परिचायक होने चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छा लेखन एक तपस्या है, जिसके लिए निरंतर अध्ययन, मनन और मंथन आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल परीक्षा अथवा नौकरी की दृष्टि से अध्ययन न करें, बल्कि मैथिली भाषा-साहित्य के संरक्षण, संवर्धन और विकास के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। लेखन की शुद्धता पर बल देते हुए उन्होंने वाक्य- विन्यास एवं भाषिक शुद्धता को उत्कृष्ट लेखन की आधारशिला बताया तथा सभी विद्यार्थियों को भविष्य में श्रेष्ठ लेखन के लिए शुभकामनाएं दीं।
पुस्तक पर चर्चा करते हुए प्रो रमण झा ने समीक्षा-विधा को साहित्य की अत्यंत महत्त्वपूर्ण विधा बताते हुए कहा कि यह साहित्य को नई दृष्टि और अमृततुल्य ऊर्जा प्रदान करती है। विषय-प्रवेश कराते हुए डॉ अरविंद कुमार सिंह झा ने ‘अनुशीलन’ को उच्चस्तरीय, नवदृष्टि-संपन्न एवं गंभीर आलोचनात्मक कृति बताया। वहीं प्रो रमेश झा ने पुस्तक की सराहना करते हुए प्रो अरुण कुमार कर्ण से भविष्य में भी इसी प्रकार की उत्कृष्ट पुस्तकों के लेखन की अपेक्षा व्यक्त की।
कार्यक्रम में शोधार्थी राजनाथ पंडित, शिवम कुमार झा, मनोज कुमार पंडित, अंबालिका कुमारी, शीला कुमारी, मनीष कुमार, नेहा कुमारी, मिथिलेश कुमार सहनी, राहुल राज गुप्ता, पवन कुमार महतो, प्रवीण कुमार, प्रियंका कुमारी सहित अनेक शोधार्थी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त अपर्णा कुमारी, आदित्य आनंद, देव आनंद, नीक्कू कुमार, नरेश पंडित सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम में विभाग के कर्मचारी निरेन्द्र कुमार एवं रामसेवक भारती की भी सक्रिय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ सुरेश पासवान ने किया। अंत में विभागाध्यक्ष एवं पुस्तक के लेखक प्रो अरुण कुमार कर्ण ने सभी अतिथियों, विद्वानों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।