माननीय विधानपार्षद श्री बंशीधर बृजवासी ने वित्तरहित कर्मियों की दुर्दशा और सरकार के सौतेला व्यवहार के खिलाफ विधानमंडल परिसर में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया और माननीय मुख्यमंत्री जी से वित्तरहित कर्मियों को जल्द वेतन देने की मांग की

पटना, 23 जुलाई – श्री बंशीधर बृजवासी, विधानपार्षद (तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र) ने आज विधानमंडल परिसर में वित्तरहित कर्मियों के दुर्दशा का वास्तविक और सजीव चित्रण किया । अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए भिखारी के वेशभूषा में भीख मांगते नजर आए।

अपने पुर बदन पर पोस्टर चिपकाए कर्मियों की वास्तविक स्थिति को दिखाया। सरकार और माननीय मुख्यमंत्री जी से इनकी समस्या के स्थाई निदान का आग्रह किया।

आज विधानमंडल बैठक प्रारंभ होने के पूर्व माननीय विधानपार्षद अपने पूरे शरीर पर वित्तरहित कर्मियों की समस्याओं को इंगित पोस्टर चिपकाए विधानमंडल के प्रवेश द्वार पर पहुंचे ।

 

विधानपार्षद महोदय एक हाथ में कटोरा और एक हाथ में थाली लिए हुए लगातार विधानमंडल परिसर में घूम-घूम कर भीख मांगते नजर आए । उन्होंने कहा कि बिहार के वित्तरहित कर्मियों की वास्तविक स्थिति यही है।

सरकार का मारा हूंँ… वक्त से हारा हूंँ…!भूखा हूंँ.. अधनंगा हूंँ..! किसी तरह से जिंदा हूंँ..!

 

पेशा- राष्ट्र में माता शिक्षक, दर्जा- भगवान से ऊपर, योग्यता- Ph.D, कार्य- शिक्षा दान और राज्य के सकल नामांकन अनुपात में 60% से अधिक की भूमिकाआजीविका का साधन- सरकारी भीख (अनुदान), जी, सही समक्षा आपने- मैं वित्त रहित शिक्षक हूँ …

विधानपार्षद महोदय इन्हीं सब स्लोगन वाले पोस्टर अपने पूरे शरीर पर चिपकाए हुए थे

भिक्षाटन करते हुए वे लगातार नाराबाजी भी कर रहे थे

वित्तरहित शिक्षा नीति वापस लो, वित्तरहित हो गया बेजान- मांग रहा है वेतनमान

वित्तरहित कर्मियों की दुर्दशा का कौन जिम्मेदार? जवाब दो बिहार सरकार

पूछता है बिहार वित्तरहित कर्मी किसका परिवार यह कैसा सुशासन है कैसा इसका फंडा है वित्तरहित शिक्षक देखो बिहार में भूखा नंगा हैउन्होंने कहा कि सरकार ने 10 महीने पहले इन कर्मियों को वेतन देने के लिए एक नौ सदस्य कमेटी बनाई थी और तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने एक सप्ताह में बैठक कराकर निर्णय लेने का सूचना विधानमंडल में दिया था । उन्होंने सरकार से पूछा कि एक सप्ताह में कितना दिन होता है ???

आज करीब 10 महीने गुजर गए सरकार इन कर्मियों के प्रति बिल्कुल लापरवाह है, ये कर्मी लगातार रोज भूखे मर रहे हैं

उन्होंने दिनकर जी की एक प्रसिद्ध कविता से इन कर्मियों की स्थिति का चित्रण करते हुए बताया कि

नित जीवन के संघर्षों से जब टूट चुका हो अन्तर्मन,तब सुख के मिले समन्दर का रह जाता कोई अर्थ नहीं।

जब फसल सूख कर जल के बिन, तिनका-तिनका बन गिर जाये,फिर होने वाली वर्षा का रह जाता कोई अर्थ नहीं।

विदित हो कि इसके पूर्वी इन्होंने वित्तरहित कर्मियों के लिए अपने मुंह में मवेशियों का जाब लगाकर विधानमंडल परिसर में प्रदर्शन किया था । वित्तरहित कर्मियों की मांग के समर्थन में विधानमंडल में इसके पहले इस तरह का प्रदर्शन नहीं हुआ था ।

पूरे बिहार के वित्तरहित कर्मी श्री बृजवासी जी के इस समर्थन के लिए हृदय से आभार प्रकट कर रहे हैं।

मीडिया प्रभारी जिला उप संयोजक जिला संयोजक

Santosh Dutta Jha: