स्थायी व सुरक्षित जगह उपलब्ध हो तो फुटकर विक्रेताओं का सुधरे कारोबार।

मधुबनी । शहर की मुख्य सड़कों और बाजार क्षेत्रों में वर्षों से सड़क किनारे ठेला लगाकर व्यापार करने वाले छोटे दुकानदार आज गहरी परेशानियों से जूझ रहे हैं। रोजी-रोटी का एकमात्र साधन समझकर फुटपाथ और सड़क के किनारे दुकान लगाने वाले इन व्यापारियों का जीवन अब अस्थिर होकर रह गया है।

 

एक तरफ आर्थिक तंगी का दबाव, दूसरी ओर प्रशासन द्वारा बार-बार हटाए जाने की कार्रवाई ने इन परिवारों की आजीविका पर गंभीर असर डाला है। शहर के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन चौक,शंकर चौक और विभिन्न मुख्य चौक-चौराहों पर वर्षों से ठेला लगाकर लोग अपना परिवार चलाते आए हैं। इलाके विक्रेता बताते हैं कि रोजाना 300 से 600 रुपये की आमदनी से ही उनका घर चलता है।

परंतु हाल के दिनों में नगर निगम और पुलिस प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान लगातार चलाए जाने से उनकी रोजमर्रा की कमाई पर गहरा संकट मंडरा गया है।सब्जी और फल बेचने वाले ठेला संचालकों का कहना है कि शहर में उनके लिए कोई स्थायी या सुरक्षित जगह उपलब्ध नहीं है, जिस कारण वे मजबूरन सड़क किनारे ही दुकान लगाते हैं।

 

प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कई बार उनका सामान सड़क पर गिरकर नष्ट हो जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। महिला व्यापारी गंगा देवी जैसी कई परिवार प्रबंधक महिलाएं बताती हैं कि ठेले से होने वाली थोड़ी-बहुत आय ही उनके बच्चों और घर का सहारा है। सब्जी विक्रेता कहते हैं, हम लोग सड़क के किनारे इसलिए दुकान लगाते हैं क्योंकि कहीं और जगह नहीं है। प्रशासन हटाता है तो हम सामान समेटकर चले जाते हैं, लेकिन पेट पालने के लिए अगले दिन फिर आना ही पड़ता है।

 

उनका कहना है कि किराए की दुकानें लेने की न तो आर्थिक क्षमता है, और न ही शहर में कहीं व्यापारियों के लिए सुरक्षित जगह उपलब्ध है जहां वो व्यापार कर सके।महिला सब्जी व्यापारी गंगा देवी बताती हैं कि ठेले पर फल सब्जी लगाकर उसे बेचकर जो थोड़ी-बहुत आय होती है, उसी से घर का खर्च चलता है। जब प्रशासन का वाहन आता है, तो सभी ठेले वाले को सड़क किनारे से हटा दिया जाता है। इससे अक्सर सामान सड़क पर गिरने से नुकसान हो जाता है जिस वजह से व्यापार में नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ता है।

 

 

व्यापारियों का कहना है कि निगर निगम उन व्यापारियों को जो सड़क के किनारे ठेला लगाकर अपना जीवन यापन करते हैं उनके लिए एक वैकल्पिक स्थान भी उपलब्ध कराए जिसे वो भी अच्छे तरह से बिना किसी भय के व्यापार कर सके।शहर के ठेला संचालक बार-बार यही अपील कर रहे हैं कि उन्हें हटाने से अधिक जरुरी है कि उन्हें सुरक्षित, कानूनी और स्थायी जगह उपलब्ध कराई जाए, जिससे वे सम्मानपूर्वक अपनी रोजी-रोटी चला सकें। अन्यथा हर कुछ दिनों पर चलने वाला यह हटाओ अभियान उनके जीवन को और अधिक कठिन बना देगा।

शहर में सड़क किनारे वर्षों से सब्जी और फल बेचकर अपना जीवन यापन करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए अब राहत की उम्मीद जगने लगी है। नगर निगम की ओर शहर में नई सब्जी मंडी स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया जा रहा है।

 

जल्द ही अंतिम स्थान तय कर दिए जाने के बाद मंडी के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सड़क किनारे व्यापार करने वाले ठेला संचालकों को इससे बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि वर्तमान स्थिति में उन्हें बार-बार हटाए जाने, सामान के नुकसान और कम होती बिक्री जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नई सब्जी मंडी बनने से न केवल व्यापारियों को स्थायी और सुरक्षित जगह मिलेगी, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था भी सुचारू होगी। मंडी तैयार होते ही सभी विक्रेताओं को वहां व्यवस्थित तरीके से बैठाने की योजना है, ताकि वे सम्मानपूर्वक और निर्बाध रूप से अपना व्यापार कर सकें।

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