विकास भवन परिसर के सामने सड़क पर खड़ी ई रिक्शा की अज्ञात चोरों के द्वारा चोरी कर ली गयी। रिक्शा चालक चंन्दन कुमार यादव ने ई रिक्शा चोरी को लेकर थाने में केस दर्ज करवाया है। 25 सितंबर को वह वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने को लेकर विकास भवन के अंदर गया था।जब वह काम करवाकर वापस आया तो उनकी ई रिक्शा गायब थी।
सहरसा स्थानीय सर्व नारायण सिंह राम कुमार सिंह महाविद्यालय में शुक्रवार को राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में क्विज एवं डिबेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। डिबेट का विषय था- वोकल फॉर लोकल। अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. अनंत कुमार सिंह एवं मंच संचालन डॉ.आर्य सिंधु ने किया। प्राचार्य ने कहा कि आज जो इतनी बीमारियां है वह स्वदेशी चीजों को ना अपनाने के कारण है। उन्होंने कहा कि हमें अपने स्थानीय चीजों का उपभोग करना होगा, तभी हम स्वस्थ रह सकते हैं।
कार्यक्रम को एनएसएस पदाधिकारी डॉ. कपिल देव कुमार पासवान , डॉ. अरविंद कुमार सिंह , डॉ संजीव शंकर सिंह , डॉ. नृपेंद्र कुमार सिन्हा ,डॉ प्रदीप कुमार ,डॉ गौतम कुमार सिंह , डॉ रामनरेश पासवान सहित अन्य ने संबोधित किया। इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. नृपेंद्र सिन्हा,डॉ. सुधांशु शेखर,डॉ प्रमोद कुमार सिंह, डॉ. आलोक आनंद,डॉ.डब्लू कुमार और डॉ. पंकज कुमार थे। इस प्रतियोगिता में विक्रम कुमार को प्रथम,आनंद कुमार को द्वितीय,देव रुद्र कुमार को तृतीय और मधु कुमारी को चतुर्थ पुरस्कार प्राप्त हुआ।
भास्कर न्यूज |सहरसा बनगांव रोड स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थित शांति अनुभूति भवन में शुक्रवार को नवरात्रि के शुभ अवसर पर बाल ब्रह्मचारिणी, तपस्विनी, वरदानी मूर्त राजयोगिनी रानी दीदी का चैतन्य देवी के रूप में सम्मान एवं अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर मुजफ्फरपुर से पधारी बिहार एवं झारखण्ड सेवाकेंद्र निदेशिका राजयोगिनी रानी दीदी ने कहा कि नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की विधिवत उपासना की जाती है। उन्हें आदिशक्ति भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने सारे जगत की मां के रूप में सभी मनुष्य आत्माओं की ज्ञान, गुण और शक्तियों से दिव्य पालना की, इसलिए उन्हें जगदम्बा मां कहते हैं। मां ने परमात्मा शिव से शक्ति लेकर शक्ति स्वरूपा बन सारे विश्व का कल्याण किया।
सभी के अंदर विराजित तमोगुण, विषय-विकारों का नाश किया, इसलिए वो शिव शक्ति कहलाईं। राजयोग के द्वारा स्वयं के अंदर अष्ट शक्तियों को धारण कर अष्टभुजा धारिणी बन आसुरी संस्कारों का मर्दन किया, तभी उनका नाम दुर्गा पड़ा अर्थात दुर्गुणों का नाश करने वाली । उन्होंने कहा कि हमें फख्र है कि हम ऐसी मां की संतान हैं।
अभी हम भी परमात्मा शिव से सर्व शक्तियां लेकर स्वयं को जगदम्बा मां समान बना सकते हैं और सृष्टि को पापाचार, भ्रष्टाचार, अनाचार से मुक्त कर भारत को फिर से देवालय सतयुग बनाने में परमात्मा शिव और मां जगदम्बा के सहयोगी बनने का भाग्य प्राप्त कर सकते हैं। स्थानीय सेवाकेन्द्र प्रभारी स्नेहा बहन ने कहा कि यह समस्त कोशी वासियों के लिए सम्मान और गौरव की बात है कि देवी स्वरूपा दीदी के चरण नवरात्रि के शुभ मौक़े से इस धरती पर पड़े।
देवी स्वरूपा दीदी के लिए हमारा सबसे बड़ा चढ़ावा यही होगा कि हम नारी शक्ति को सम्मान की दृष्टि से देखें और भारत के गौरवशाली अतीत, जहां देवियों का नाम देवताओं से पहले लिया जाता रहा है, को पुनः स्थापित करने की दिशा में अपने विचारों को सद्गुणों से सजाएं। इस अवसर राजयोगिनी रानी दीदी का मुकुट, माला एवं चुनरी से सम्मान एवं अभिनंदन किया गया, आरती की गई और बच्चियों के द्वारा नृत्य प्रस्तुत किया गया। साथ-साथ स्नेहा बहन, पुष्पा बहन, वंदना बहन, पूनम बहन, रूबी बहन और माउंट आबू से पधारे योगेश्वर भाई का भी सम्मान किया गया।