गिद्धौर प्रखंड में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान अधिकारियों की उदासीनता से प्रभावित हो रहा है। मनरेगा और पंद्रहवें वित्त की योजना के तहत स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत निर्मित कचरा प्रोसेसिंग यूनिट निष्क्रिय पड़ी है।
प्रखंड के प्रत्येक वार्ड में ठोस और तरल कचरे के लिए डंपिंग यार्ड का निर्माण किया गया। इस पर लाखों रुपये का व्यय हुआ। कचरा संग्रहण के लिए स्वच्छता कर्मी और सुपरवाइजर नियुक्त किए गए। साथ ही रिक्शा और बैटरी चालित टोटो रिक्शा की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।
योजना का लक्ष्य था कि नागरिक कचरा इधर-उधर न फेंके। स्वच्छता कर्मी घर-घर से कचरा एकत्र कर डंपिंग यार्ड में जमा करें। वार्डों में गीले और सूखे कचरे के लिए पृथक डस्टबिन वितरित किए गए।
मुखिया और पंचायत सचिव की लापरवाही के कारण कई महीनों से कचरा संग्रहण कार्य रुका हुआ है। कोल्हुआ पंचायत के विनोद पासवान, विभूति मंडल और कुंदन कुमार सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छता कर्मियों को कई महीनों से मानदेय नहीं मिला है। इससे पूरी योजना प्रभावित हुई है।
स्वच्छता कोऑर्डिनेटर प्रियंका रानी का कहना है कि स्वच्छता कर्मी अपना कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र के लोगों को कोई समस्या है तो जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।