सहरसा के 300 बेड वाले मॉडल अस्पताल परिसर में जलजमाव और कचरे की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। अस्पताल की इमरजेंसी के पीछे और आसपास बारिश का पानी जमा है। जगह-जगह फैला कचरा मरीजों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
मेडिकल कचरे का उठाव एजेंसी द्वारा किया जा रहा है। लेकिन सामान्य कचरे की सफाई में लापरवाही बरती जा रही है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडल अस्पताल
समाजसेवी प्रवीण आनंद ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडल अस्पताल बनाया। लेकिन यहां की स्वच्छता व्यवस्था बदहाल है। उनका कहना है कि इलाज के लिए आने वाले मरीज ठीक होने के बजाय नई बीमारियां लेकर लौट सकते हैं। वे आरोप लगाया कि इच्छा शक्ति की कमी है और जिस वजह से अस्पताल आने वाले मरीज या मरीज के परिजन परेशान हलकान बने रहते है।
मुख्य गेट के बाहर जलजमाव
प्रवीण आनंद ने बताया कि इमरजेंसी के पास और एक्स-रे कक्ष के सामने स्थित मुख्य गेट के बाहर जलजमाव है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में आने-जाने में भारी दिक्कत हो रही है। गंदा पानी और फैली गंदगी बदबू फैला रही है। यह मच्छरों और अन्य कीट-पतंगों के पनपने का भी कारण बन रही है। इस स्थिति से डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई
अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. रमन कुमार झा ने बताया कि नगर निगम को कई बार पत्राचार कर कचरा उठाव और पानी की निकासी के लिए लिखा गया है। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नगर निगम शीघ्र इस समस्या का समाधान करेगा।
मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक लापरवाही
स्थानीय लोगों का कहना है कि मॉडल अस्पताल जैसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र में इस तरह की लापरवाही मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। यह सरकारी खर्च और व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े करती है। समय रहते कचरा प्रबंधन और जल निकासी की व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।