सहरसा के बनमा इटहरी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक भगवानपुर महादेव मंदिर में पूर्णिमा के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन पूर्व प्रमुख रमेशचंद्र यादव, मुखिया मुकेश शर्मा, मेला कमिटी अध्यक्ष रामचंद्र यादव और जिला परिषद प्रतिनिधि अरविन्द यादव ने संयुक्त रूप से किया। इसमें मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में दो दिवसीय दंगल कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। जिसमें मधेपुरा के सांसद दिनेश चंद्र यादव ने शिरकत की।
कुश्ती प्रतियोगिता बना आकर्षण का केन्द्र
दो दिवसीय महादंगल कुश्ती प्रतियोगिता में नेपाल के अलावा हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बनारस से आए नामी पहलवानों ने अपना दमखम दिखाया। इस रोमांचक प्रतियोगिता को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक जुटे।
सांसद दिनेश चंद्र यादव ने दर्शकों और पहलवानों का अभिवादन करते हुए कहा कि कुश्ती न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि मानसिक संतुलन और सामाजिक भाईचारा भी बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों को अपनाना चाहिए। यह खेल न केवल शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देता है, बल्कि सामजिक समूहों के बीच मेलजोल और भाईचारे को भी प्रोत्साहित करता है।
प्रतिभागियों ने किया अद्भुत प्रदर्शन
सांसद ने भेलवा निवासियों को इस भव्य आयोजन के लिए धन्यवाद दिया और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। मुकाबलों में बक्सर के काशी पहलवान ने गोरखपुर के दिव्यांशु पहलवान को हराया। बनारस के रोहित सिंह ने अयोध्या के आशीष जाट को पराजित किया। इसके अलावा फुसन साह ने पुरीख राम को और गगन यादव निर्मली ने अपने प्रतिद्वंद्वी को हराकर दर्शकों का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम में सिमरी बख्तियारपुर के पूर्व विधायक डॉ. अरुण कुमार, सांसद प्रतिनिधि अंजुम हुसैन, राजद के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र यादव, जदयू के वरिष्ठ नेता जवाहर यादव, जदयू के जिला महासचिव और मीडिया प्रभारी रंजीत कुमार सिंह बबलू, जदयू के वरिष्ठ नेता प्रो. हरिनारायण यादव, पूर्व प्रमुख अरविंद यादव, सुरेश यादव, अर्जुन ठाकुर सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।
महादंगल कुश्ती प्रतियोगिता बना आकर्षण का केन्द्र।
बता दें कि भगवानपुर महादेव मंदिर अपनी प्राचीनता के लिए विख्यात है। बिहार, झारखंड और नेपाल से हजारों श्रद्धालु यहां अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर आते हैं। पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। मेले में बच्चों के लिए झूले और खिलौनों की दुकानें लगाई गई। साथ ही खान-पान की विभिन्न स्टॉल्स ने लोगों को आकर्षित किया।