दरभंगा : दरभंगा परिवहन कार्यालय में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस का भंडाफोड

 

साथ ही, इस फर्जीवाड़े में शामिल तत्कालीन डाटा ऑपरेटर रूपेश कुमार और प्रोग्रामर विक्रमजीत प्रताप की सेवाएं समाप्त कर उन्हें बेल्ट्रोन को वापस भेजने का निर्देश दिया गया है।

इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब यह पाया गया कि दरभंगा परिवहन कार्यालय से एक ही ड्राइविंग लाइसेंस नंबर पर तीन अलग-अलग व्यक्तियों के नाम से लाइसेंस जारी किए गए। इन लाइसेंस में जाति, धर्म, जन्मतिथि और पते जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों में हेरफेर किया गया था।

जानकारी के अनुसार, तत्कालीन डीटीओ शशि शेखरण, जो मधुबनी में पदस्थापित थे, ने दरभंगा से इन फर्जी लाइसेंसों को निर्गत किया। इन लाइसेंसों का इस्तेमाल बिहार, अरुणाचल प्रदेश, और झारखंड जैसे राज्यों में अलग-अलग नामों और पतों के साथ किया गया। मामले की जांच डीएम के निर्देश पर गठित समिति ने की।

समिति में अपर जिला परिवहन पदाधिकारी स्नेहा अग्रवाल, मोटरयान निरीक्षक सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी, सतीश कुमार, और प्रोग्रामर सोनी कुमारी शामिल थे। 13 अगस्त 2024 को पेश की गई जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मधुबनी में बैठकर दरभंगा से फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाए गए। इस फर्जीवाड़े की गंभीरता तब और बढ़ गई जब जांच में यह पाया गया कि लाइसेंस जारी करने में धर्म और जाति तक का ख्याल नहीं रखा गया।

हिंदू व्यक्तियों को मुस्लिम और मुस्लिम व्यक्तियों को हिंदू दर्शाते हुए ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत किए गए। यह अनियमितता न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत आपत्तिजनक है। परिवहन विभाग ने डीएम को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। दोषी अधिकारियों और कर्मियों पर आपराधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।

इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। फर्जी लाइसेंस घोटाले से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार की पोल खोलता है, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

Darbhanga Office: